अंतर्राष्टीय

मिजोरम के एक बच्चे ने जीव दया की एक नई कहानी गढ़ी – जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर छा गया – गिरीश जे. शाह

 

आज समूचे विश्व में मानवता,दया, करुणा एवं जीव रक्षा जैसे शब्द धीरे-धीरे अनसुने हो रहे हैं. ऐसा लगता है यह सभी लुप्त प्राय हो जाएंगे.दया और करुणा मानव स्तित्व से जुड़ा हुआ एक ऐसा भावनात्मक आभास है,हमारे जीवन की जरूरत है जिससे हमारे रिश्तो की गांठ बधी हुई है.यह एक ऐसा विषय है जिससे मानव की मनुष्यता ही नहीं कायम रहती बल्कि आज धरती को बचाने के लिए मानव को महसूस करने और मर्यादाओं का पालन करने की बहुत बड़ी आवश्यकता है.इस दिशा में भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के हर प्रयास का बहुत बड़ा महत्व है .इसलिए कि धरती और पर्यावरण को बचाने के लिए जीव जंतुओं की रक्षा करनी ही होगी.उन पर हो रहे अपराधों को दूर करना होगा जिसमें माननीय मूल्यों -अनुभूतियों का बहुत बड़ा रोल हो जाता है.
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इस सिलसिले में अभी हाल में ही एक बड़ी प्रेरक घटना सामने आई है जो सोशल मीडिया में एक आकर्षण का केंद्र बन गया .आज इस घटना की काफी चर्चा में है. लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं. इस पोस्ट को हजारों लोग शेयर किए. किसी ने दिल को छू लेने वाली पोस्ट बताया तो किसी ने भगवान से बच्चे के लिए आशीर्वाद माँगा। दरअसल ,घटना कुछ इस प्रकार है कि मिजोरम के साईरंग में 6 वर्षीय डेरेक लालचनहिमा नाम के बच्चे की सोच ने सबको सोचने पर विवश कर दिया है. 6 वर्षीय डेरेक ने गलती से मुर्गी के चूजे के ऊपर साइकल चढ़ा दी थी. जिसके बाद वो घबरा गया और चूजे को लेकर अस्पताल पहुंचा. उसके एक हाथ में दस रुपये थे तो दूसरे हाथ में मुर्गे का बच्चा था. अस्पताल के कर्मचारी बच्चे को देखकर हैरान रह गए और उसकी फोटो खींचे.

फेसबुक में जब किसी ने इस बच्चे की तस्वीर को शेयर किया है तो लोग देखकर दंग हो गए. डेरेक के पिता ने यह पूरी घटना एक- एक कर बताई और कहा उनका बच्चा जब चूजे के साथ जब घर पहुंचा तो वह बहुत घबराया था। उसके चेहरे पर प्रयश्चित की लकीरें दिखाई दे रही थी क्योंकि उसने गलती से चूजे के ऊपर साइकिल चढ़ा दिया था.उस समय उसको यह पता नहीं था कि चूजा मर चुका है.डेरेक ने अपने पिता से कहा कि इसे अस्पताल ले चलिए तो पिता ने अस्पताल जाने से मना कर दिया और बच्चे को खुद जाने को कहा. उस वक्त बच्चे की गुल्लक में 10 रुपये थे और उसने गुल्लक के पैसे निकाले और चूजे को लेकर अस्तपाल पहुंच गया. ‘

अस्पताल के कर्मचारी बच्चे की करुणा भाव देख कर बहुत प्रभावित हुए.उस समय अस्पताल में तैनात नर्स मैं उस बच्चे की तस्वीर ली और सोशल मीडिया में डाल दिया . बच्चे की मासूम फोटो सोशल मीडिया खूब वायरल हुआ.लोगों ने सोशल मीडिया पर इस बच्चे को काफी पसंद किया .उसके पिता ने यह बताया कि डेरेक अस्पताल से एक बार और वापस घर लौटा था और चूजे की चिकित्सा के लिए 100 रुपये लेकर दोबारा अस्पताल गया. जिसके बाद बच्चे के माता-पिता ने समझाया कि चूजे मर चुका है और अस्पताल जाने से कोई फायदा नहीं किंतु बच्चा इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं था.

मैं यहां बताना चाहूंगा कि भारत सरकार के अधीन कार्यरत भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड की संपूर्ण गतिविधियों का आधारशिला मात्रा जीव दया ही है . सरकार निरीह जीव-जंतुओं पर होने वाले जुल्म और अत्याचार रोकने का कार्य करता है. साथ ही साथ उनके कल्याण की विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाता है.जिनमें बच्चों मेंदया की भावना पैदा करने के लिए कई प्रकार के शैक्षिक एवं जागरूकता के कार्यक्रम चलाए जाते हैं ताकि बच्चों के अंदर दया और करुणा की अनुभूति जागृत किया जा सके .

जीव दया के दिशा में सरकार के द्वारा किए गए कार्यों पर ही सिर्फ निर्भर होकर यदि हम किसी परिवर्तन की आकांक्षा करें तो अनुचित है.हमें किसी ग्रुप के साथ साथ व्यक्तिगत तौर पर आगे आना होगा.हर आदमी को मिजोरम के बच्चे जैसा पेश आना चाहिए ताकि धरती और पर्यावरण को सुरक्षित रख सकें.।

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