राष्ट्रीय

रामचंद्र गुहा प्रकरण पर ब्लॉग: पढ़ने-लिखने से ज़्यादा ज़रूरी ‘हिंदूवादी देशभक्ति’ है

‘देशद्रोहियों’ की लंबी होती सूची में एक और नाम जुड़ गया है इतिहासकार रामचंद्र गुहा का. गुहा अहमदाबाद यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर नहीं होंगे क्योंकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की नज़रों में वे ‘शिक्षा और देश के लिए नुकसानदेह हैं.

रामचंद्र गुहा के बारे में बात करने से पहले ज़रा पीछे चलें तो इस ट्रेंड को समझने में आसानी होगी.

27 सितंबर 2018- मध्य प्रदेश में मंदसौर के एक सरकारी कॉलेज के एक प्रोफ़ेसर ने क्लासरूम में नारेबाज़ी कर रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों से पैर छूकर माफ़ी मांगी थी.

यह वीडियो एक दिन के लिए वायरल हुआ उसके बाद लोग उसे भूल गए, ‘देशद्रोही’ घोषित किए गए प्रोफ़ेसर साहब ने गांधीवादी तरीक़े से अपना विरोध प्रकट किया था, और समझदारी भी इसी में थी.

उसी राज्य में उज्जैन में 2006 में माधव कॉलेज के प्रोफ़ेसर सभरवाल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, उन्हें पीटने का आरोप जिन छह लोगों पर लगा था वे भी एबीवीपी के ‘देशभक्त छात्र नेता’ थे.