शिक्षा

तकनीक में कतई पीछे नहीं है – हिंदी

मोबाइल, क्लाउड, पर्सनल कम्प्यूटर का पिछले एक दशक में भाषाई तकनीक का लगभग कायाकल्प हो चुका है।

और इंटेलिजेंट उपकरणों तक ऐसा कोई क्षेत्र नहीं दिखता, जिसमें हिंदी की उपस्थिति न हो। डाटा एनालिसिस, बिग

डाटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि तमाम आधुनिकतम क्षेत्रों में हिंदी का अभिनव प्रयोग हो रहा है। साउंड, मशीन ट्रांसलेशन जैसे क्षेत्रों में भी हिंदी मौजूद है लेकिन यदि कमी है, जो ज्यादातर आम उपयोगकर्ताओं तक इनके बारे में जानकारी न पहुंच पाने की। सच तो यह है कि आधुनिक तकनीक के दौर में हिंदी भाषी उपयोगकर्ताओं की चिंताएं हैं, तो उनके समाधान भी हैं।

टाइपिंग पद्धतियां

कई लोग कम्प्यूटर पर हिंदी टाइपिंग को लेकर आशंकित रहते हैं। सच तो यह है कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। ऐसे लोगों को चाहिए कि रोज थोड़ा समय निकालकर इनस्क्रिप्ट या ट्रांसलिटरेशन जैसी टाइपिंग पद्धतियां सीख लें।

इनस्क्रिप्ट तो सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि यह हर उपकरण, हर ऑपरेटिंग सिस्टम पर उपलब्ध है। आज भी और आगे भी रहेगी। यदि आपने बहुत पहले टाइपराइटर्स के जमाने में रेमिंगटन पद्धति से हिंदी टाइपिंग सीखी है और उसी से

टाइप करना चाहते हैं, तो इंटरनेट पर सर्च करें। कुछ डेवलपर्स ने ऐसे टूल उपलब्ध कराए हैं, जिनके जरिए आप कम्प्यूटर पर इस पद्धति से भी टाइप कर सकते हैं।

फॉन्ट परिवर्तन

बहुत सारे लोगों के साथ यह समस्या आती है कि कृति से यूनिकोड और यूनिकोड से कृति में फॉन्ट परिवर्तन करते

समय सौ फीसदी रूपांतरण क्यों नहीं होता। ऐसा कभी भी नहीं हो सकेगा, क्योंकि कृति आदि फॉन्ट पुरानी एस्की

एनकोडिंग के लिहाज से बनाए गए थे, जिसमें 127 अक्षरों की सीमा था। यूनिकोड में हिंदी के सभी अक्षरों के लिए

पर्याप्त स्थान उपलब्ध है। कृति जैसे पुराने फॉन्ट्स को उनके निर्माताओं ने बिना किसी स्पष्ट नियम के बनाया था और उन फॉन्ट्स में ऐसे भी हिज्जे शामिल किए थे, जो हिंदी की वर्णमाला में हैं ही नहीं। मसलन, छोटी ई की मात्रा के साथ बिंदु और रेफ का निशान एक अलग कैरेक्टर के रूप में सहेजा गया था। दूसरी ओर, यूनिकोड पूरी तरह देवनागरी वर्णमाला का पालन करता है। ऐसे में कृति आदि में बनी फाइलों में जहां भी ऐसे अवास्तविक कैरेक्टर आते हैं, वहां उनका ढंग से परिवर्तन नहीं हो पाता है।

यूनिकोड फॉन्ट

यह सवाल अक्सर उठाया जाता है कि हिंदी में यूनिकोड का सिर्फ एक ही फॉन्ट (मंगल) क्यों है? यह सवाल पूरी तरह से अनभिज्ञता पर आधारित है। माइक्रोसॉफ्ट ने ही हिंदी में मंगल के अतिरिक्त अनेक फॉन्ट उपलब्ध कराए हैं, जैसे अपराजिता, कोकिला, निर्मला, एरियल यूनिकोड एमएस और उत्साह। गूगल ने कुछ दर्जन यूनिकोड देवनागरी फॉन्ट डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध कराए हैं। साथ ही, भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी

विभाग की परियोजना टीडीआईएल के तहत लगभग 50 हिंदी यूनिकोड फॉन्ट निःशुल्क उपलब्ध कराए गए हैं। इतना ही नहीं, एडोबी के एडोबी देवनागरी, लिनक्स के लोहित के अलावा कई अन्य संस्थानों ने यूनिकोड फॉन्ट

जारी किए हैं। समिट, मॉड्‌यूलर जैसे संस्थानों ने पारंपरिक फॉन्ट को यूनिकोड में बदल दिया है और ये फॉन्ट उनकी वेबसाइट्‌स से खरीदे जा सकते हैं। हिंदी में ज्यादा नहीं, तो करीब डेढ़ सौ यूनिकोड फॉन्ट तो उपलब्ध हैं ही।

मशीन ट्रांसलेशन

ऑनलाइन अनुवाद पूरी तरह शुद्ध क्यों नहीं होता? गूगल व बिंग पर मशीन अनुवाद का इस्तेमाल करने वाले लोग अक्सर यह सवाल पूछते हैं। अब मशीन अनुवाद लगातार समृद्ध हो रहा है और होता रहेगा। गूगल व बिंग की अनुवाद परियोजनाएं मात्र एक दशक पुरानी हैं और इतने समय में वे यहां तक आ पहुंची हैं कि आपके छोटे वाक्यों का ठीक-ठाक अनुवाद करने लगी हैं। इसलिए आप छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग करें।