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डबरा । ग्वालियर । निरंकुश पुलिस की निरंकुश शासन प्रणाली* *बिना दोनों पक्षों की जांच करें पुलिस ने एकतरफा करी पत्रकारों पर कार्रवाई**

अजय  दुबे की कलम से
ग्वालियर ।डबरा विकास 16 तारीख को देहात थाना डबरा से एक मामला संज्ञान में आया है जहां पर कुछ निर्दोष पत्रकारों पर पुलिस ने अपने निरंकुश शासन प्रणाली के द्वारा मुकदमा दायर करके पत्रकारों को ही आरोपी बना दिया मामले की पुष्टि करते हुए यह मामला संज्ञान में आया है आया है कि सिरोही बरोठा रोड स्थित आरामशीन पर मालिक के द्वारा हरे पेड़ की लकड़ी कटवा कर उस पेड़ को आरामशीन के द्वारा काटकर नेस्तनाबूद करने पर जब पत्रकारों ने इसका विरोध किया तब उल्टे आरा मशीन के मालिक ने पत्रकारों पर ₹15000 रुपए का बल पूर्वक वसूलने का ही आरोप लगा दिया एक तरफ जहां मध्य प्रदेश सरकार और भारत सरकार हरित क्रांति लाने की तरफ अग्रसर हो रही है वही इस प्रकार के आरामशीन मालिक अपने निजी स्वार्थों के लिए हरे हरे पेड़ की लकड़ी को कटवा कर अपने व्यापार को हरा-भरा करने में लगे हुए हैं मामला डबरा के देहात थाने का है आरा मशीन मालिक ने अपने कर्मचारियों के द्वारा हरे भरे पेड़ों को कटवा कर अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति करने की मंशा बनाई वहीं कुछ ईमानदार पत्रकारों ने जब उसकी वन विभाग के अधिकारी एवं एसडीएम राघवेंद्र पांडे डबरा तहसीलदार थाना प्रभारी महोदय को सूचना दी गई तब उल्टे पत्रकारों को ही लेने के देने पड़ गए आरामशीन मालिक ने यह कहते हुए उन पर आरोप लगाया कि इन पत्रकारों ने ₹15000 की मांग करी है तथा आरामशीन को बंद कराने की धमकी दी है सबसे बड़ा करने वाली बात तो यह है कि 18 तारीख को यह आवेदन देहात थाने को दिया गया इसके 1 दिन पूर्व ही पत्रकारों ने 17 तारीख को अपना आवेदन थाना प्रभारी महोदय को सौंप दिया था लेकिन पुलिस के निरंकुश शासन प्रणाली के द्वारा एकतरफा कार्रवाई करते हुए पत्रकारों के ऊपर मुकदमा पंजीकृत कर दिया यहां एक बात बड़ी विचार नहीं है कि पुलिस ने 24 घंटे के अंदर जांच प्रतिवेदन कैसे पूरा करके पत्रकारों का आरोपी बना दिया तथा जो पत्रकारों ने आवेदन आवेदन दिया था उसके ऊपर कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं करी गई इससे यह प्रतीत होता है कि आरामशीन क्षेत्रीय कुछ बाहुबली नेताओं के द्वारा पुलिस के ऊपर दबाव बनाकर पत्रकारों पर कार्रवाई गई लेकिन जब दबाव बनाया गया तो पुलिस क्या आराम कर रही थी क्या उन्हें सच और झूठ का अंतर स्पष्ट सामने नहीं दिखाई दे रहा था जब पत्रकारों ने अपना आवेदन 1 दिन पहले दे दिया तब पुलिस का एकतरफा कार्रवाई करना निश्चित संदेह के घेरे में आता है वहीं सूत्रों के द्वारा या खबर भी आई है कि कांग्रेस की पूर्व कैबिनेट मंत्री कांग्रेश से भाजपा में शामिल हुई एक महिला नेत्री ने पुलिस के ऊपर दबाव बनवा कर यह कार्रवाई कराई गई इससे यह प्रतीत होता कि कहीं ना कहीं आरामशीन मालिक के व्यापार में इनकी भी हिस्सेदारी नजर आती है जब हमारे पत्रकार ने और गहराई से इस चीज की जांच करी तो यह पता लगाया गया कि थाना गिजोरा प्रभारी 1 हफ्ते पहले ही थाने से उनका स्थानांतरण हो चुका हैं लेकिन उन्होंने अभी तक थाना प्रभारी महोदय ने थाने से अपना प्रभार मुक्त नहीं करा इन सब घटनाक्रमों को देखते हुए निश्चित या राय बनती है कि कहीं ना कहीं पुलिस की भी इस आरामशीन में बड़ी हिस्सेदारी है जब हमारे पत्रकार ने एडीजी राजा बाबू सिंह से इस बारे में बात करी तब एडीजी ने यह कहते हुए बात को टाल दी कि मुझे मामले का पूरा संज्ञान नहीं है एक ओर जहां पुलिस का 24 घंटे के अंदर जांच प्रणाली को पूरा करके पत्रकारों को आरोपी बनाकर उनके ऊपर मुकदमा पंजीकृत भी कहीं ना कहीं संदेह के घेरे में यहां आता है कि ऐसे कौन से स्पष्ट तथ्य थे जिसके आधार पर पुलिस ने 24 घंटे के अंदर मामला पंजीकृत कर दिया क्या सिर्फ रिकॉर्डिंग के बल पर मुकदमा 24 घंटे के अंदर कायम हो सकता है या उसकी जांच किसी लेबोरेटरी से कराने के बाद मुकदमा पंजीकृत होता है क्या पुलिस को इस चीज का अंदेशा नहीं है इससे यह तो स्पष्ट हो जाता है कि कहीं ना कहीं बाहुबली नेता और पुलिस की एक बड़ी मिली सांठगांठ के आधार पर आरा मशीन का संचालन हो रहा है तथा इस आरा मशीन के अंदर यह सब कहीं ना कहीं पूर्ण रूप से भागीदार है इस विषय को लेकर शनिवार को शाम 5:00 बजे पत्रकार साथी डबरा के नेता गृह मंत्री से मिले और झूठी f.i.r. दर्ज के विरोध में ज्ञापन दिया गृह मंत्री जी ने विश्वास दिलाया कि एसपी ग्वालियर को आदेश दिया कि सही जांच की जाए वहीं दूसरी ओर रविवार को 5:00 बजे आरामशीन के संचालक परिवार सहित गृह मंत्री से मिले गृह मंत्री ने डीएफओ को आदेश दिया कि तत्काल जांच करें

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