अंतर्राष्टीय

मुम्बई । ऑस्ट्रेलिया में पानी की कमी से निपटने के लिए ऊंटों की बलि मौत के दरवाज़े पर खड़े 10,000 ऊंटों की प्राण रक्षा के लिए पीटीजन भेजिए: गिरीश जयंतीलाल 

 

ऑस्ट्रेलिया में पानी की कमी से निपटने के लिए ऊंटों को मारने का आदेश- वही दूसरी तरफ 100 करोड़ से अधिक पशु-पक्षी एवं १.५ करोड़ एकड़ का हरा-भरा जंगल आग की भयंकर लपटों में जल कर  राख  हो गया ……….

भारत सरकार के  अधीन कार्यरत  भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड -“एडब्ल्यूबीआई” के सदस्य गिरीश जयंतीलाल शाह ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री  स्कॉट मॉरीसन को एक पत्र लिखकर के उनसे आग्रह किया है कि अपने देश के 10,000 ऊंटों को पानी की बचत के लिए मौत के घाट न उतारें।  यह बता दें कि ऑस्ट्रेलिया में जंगल में आग लगने से  जो हृदय विदारक  दृश्य सामने आया है वह समूचे दुनिया भर के  सभी देशों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है कि  प्रकृति के कोप उबर पाना बहुत मुश्किल है। पिछले माह लगी आग 1.5 करोड़ एकड़ के जंगल को अपने आगोश में समेट लिया जिसमें तकरीबन 100 करोड़ पशु – पक्षी  झुलस के मर गए।  इस विनाश लीला की आवाज पूरे दुनिया में गूंज रही है। ऑस्ट्रेलिया सरकार इतनी बड़ी घटना के बाद भी 10000 लोगों को मारने का आदेश दे दिया है। विश्व भर के पशु प्रेमी इसका विरोध कर रहे हैं।  इस विरोध को दर्ज कराने के लिए  भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य गिरीश जयंतीलाल शाह भी आगे आए और भारत के पशु प्रेमियों को अपना विरोध जताने के लिए आग्रह किया है।

शाह ने अपने पत्र में ऑस्ट्रेलिया में लगे जंगली आग से करोड़ों जानवरों के मृत्यु की घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को अपनी संवेदना, सहानुभूति और दुख प्रकट करते हुए अपनी भावना को व्यक्त  करते हुए  इतने बड़े हादसे के प्रति दुख व्यक्त किया है  और कहा है कि  “ऑस्ट्रेलिया मैं लगी  जंगल की आग  इस सदी की एक भयावह त्रासदी है।  ऐसे दुखद घड़ी में भारत सहित समूचे विश्व के पशु प्रेमी इस पीड़ा को समझ सकते हैं।”  उन्होंने आगे लिखा है कि ” तड़प तड़प कर  जान गवांते हजारों पशु पक्षी, जलते हुए वनस्पतियां और प्राकृतिक संपदा देखते ही देखते राख हो गए।” उन्होंने अपने पत्र में  आगे यह भी लिखा है कि “निस्संदेह,  यह दुखद घटना ऑस्ट्रेलिया सहित समूचे विश्व के लिए  जहां एक नई सीख दे गया। साथ ही साथ ऑस्ट्रेलिया को  कई प्रकार के पर्यावरणीय और पारिस्थितिकय  समस्याओं और चुनौतियों को न्योता दे गया जिसे आए दिनों में  ऑस्ट्रेलिया को सामना करना पड़ेगा। उत्पन्न होने वाली पर्यावरणीय  समस्याओं से आस्ट्रेलिया को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सामाजिक-आर्थिक विकास कार्य भी प्रभावित होगा।” सहानुभूति प्रकट करते हुए शाह ने ऑस्ट्रेलिया के सभी जीव जंतुओं एवम प्राणियों सहित ऑस्ट्रेलिया के निवासियों की सुरक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना किया।

अपने पत्र में शाह ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन से अपील किया कि ” मीडिया  द्वारा 10 ,000  ऊंटों की हत्या का समाचार को  पढ़कर  भारत के  सभी पशु प्रेमी अत्यंत दुखित हैं।  इसलिए वह चाहते हैं कि  ऑस्ट्रेलिया सरकार अपने आदेश को वापस ले ले और ऊंटों की हत्या न की जाए।”  उन्होंने अपने अपील में यह भी कहा है कि  ” जानने में आया है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार इसलिए उन्हें मार देना चाहती है क्योंकि ऊंटों  की वजह से  पानी की खपत  बहुत बढ़ गई है। ऐसी परिस्थिति में ऑस्ट्रेलिया सरकार को लगता है कि  ऊंटों की हत्या करके उनके  देश में पानी की कमी  पूरी हो जाएगी। क्या पानी की कमी दूर करने के लिए ऊंटों की हत्या एक अंतिम विकल्प बचा है।”  उन्होंने अपने पत्र में इस बात का विशेष उल्लेख किया है कि  “ऑस्ट्रेलिया में भ्रम बस यह माना जा रहा है कि ऊंटों और अन्य जंगली जानवरों के कारण पानी की आपूर्ति में कठिनाई बढ़ जाएगी जिससे मानव समुदाय के लिए एक बड़ा खतरा  हो गया हैं। साथ साथ इन पशुओं द्वारा भोजन और पानी का भारी नुकसान भी होगा। इसलिए उनके विनाश का ही रास्ता सरल उपाय है” शाह ने  ऑस्ट्रेलिया के इस विचार का खंडन करते हुए इसे एक भ्रम बताया  और उन्हें इससे बाहर आकर सच्चाई और झूठ का अंतर समझने का अनुरोध किया है।

अपने पत्र में  ऑस्ट्रेलिया  को आभास कराया है कि ऊंटों  मारने का आदेश एक बहुत दुखद  निर्णय है। जंगल की आग में 5,000  विभिन्न प्रजाति  के  पशु -पक्षियों को खोने के बाद सरकार द्वारा यह कृत्य बेहद दुखद है।  अपने पत्र में उन्होंने  आगाह करते हुए कहा कि अब ऑस्ट्रेलिया सरकार इंसानों की सुरक्षा के लिए जानवरों को मारने का नया इंतजाम कर रहा है जबकि उन्हें जीव जंतुओं की सुरक्षा के साथ प्राकृतिक संसाधनों संरक्षण संवर्धन की बात करनी चाहिए क्योंकि जंगल की आग के कारण  इतना बड़ा विनाश हुआ।  किसलिए उनका देश  जीव जंतुओ के रक्षण- संरक्षण  यह जगह ऊंटों और अन्य जानवरों को निशाना बना रहा है जो निहायत  अनुचित ,अमानवीय और अनैतिक कार्य है जो प्रकृति के  बिल्कुल प्रतिकूल है।  ऐसे में उनके  सरकार द्वारा पशु -पक्षियों को  अब आश्रय और  स्वास्थ्य सुविधाएं दी जानी चाहिए न की उन्हें मारना चाहिए।  शाह ने ऑस्ट्रेलिया में पशु संरक्षण पर सुझाव देते हुए बताया कि इस समस्या को सुलझाने के लिए हजारों बाय मौजूद हैं जैसे कि उन्हें किसी अन्य स्थान पर भेजना या जानवरों का आदान-प्रदान करने के लिए उन्हें या देशों मैं स्थानांतरित  अथवा वितरित करना। उन्हें मारने से उनकी नस्ल विलुप्त हो जाएगा जिसका सीधा असर वहां के पारिस्थितिकी असंतुलन पर पड़ेगा और इसका खामियाजा वहां की जनसामान्य को उठाना पड़ेगा।

शाह ने  ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री से  अपने पत्र के माध्यम से  अत्यंत विनम्रता पूर्वक आग्रह किया है कि ऊंटों को  मारने आदेश वापस अविलंब वापस ले लिया जाए।अन्यथा, इससे सिर्फ ऑस्ट्रेलिया ही नहीं पूरी दुनिया में चलाए जा रहे पशु संरक्षण -संवर्धन  और पशु कल्याण कार्यक्रमो  पर गलत असर पड़ेगा। जिसका नतीजा होगा कि जलवायु परिवर्तन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं नियंत्रण कार्यक्रम हतोत्साहित होंगे और उसका सीधा असर मानव जाति पर पड़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपने पत्र में  याद दिलाया कि भारत हमेशा से जानवरों पर होने वाले अत्याचार और अपराध के खिलाफ रहा है।  भारत देश ने महात्मा गांधी, भगवान महावीर, गौतम बुद्ध और कई आध्यात्मिक महापुरुषों के माध्यम से  समूची दुनिया को “अहिंसा” का संदेश दिया जिससे आज  विश्व भर में अहिंसावादी  विचारधारा के करोड़ों अनुयाई हैं।

उन्होंने अपने अपील में यह कहा कि इस तरह की हत्या बहुत बड़ा पाप है ओल्ड ऑस्ट्रेलिया सरकार सिर्फ इंसानी सुख सुविधा का ध्यान रखते हुए पृथ्वी के इतने सुंदर जीवो का विनाश करने का निर्णय ले लिया। इनकी सुरक्षा, ऑस्ट्रेलिया के निवासियों की सुरक्षा और समूची पृथ्वी पर मौजूद जीव जंतुओं की सुरक्षा किया जाना चाहिए न कि इनको मारने की अनुमति देना चाहिए। यह कितनी दुखद बात है कि  अपने सुख के लिए निर्दोष जानवरों को दोषी ठहराते हुए उनकी हत्या कर समस्या का निदान ढूंढा जाए। आज इस झूठ और सत्य को गंभीरता से समझने की जरूरत है। शाह ने अभी कहा है कि सिर्फ भारतीय ही नहीं समूचे विश्व के पशु प्रेमियों की अपील सुनी जाएगी और एक सकारात्मक समाचार सुनने को मिलेगा।

पत्र के आखिर में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री से गंभीरता से विचार कर सकारात्मक निर्णय लेने का अनुरोध किया है और कहा कि करोड़ों भारतीय पशु प्रेमी और पशु कल्याण कार्यकर्ता चाहते हैं  कि ऊंटों को मारने के आदेश को तुरंत वापस लिया जाए।इस दिशा में ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा सकारात्मक समाचार सुनने को मिलेगा, उन्हें ऐसी आशा और विश्वास है।  देशभर के पशु प्रेमियों से उन्होंने आग्रह किया है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार को अपनी पिटिशन भेजें और आग्रह करें कि 10,000 ऊंटों  की हत्या न की जाए।

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