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महाराष्ट्र । मुंबई में आयोजित “श्री गुरु प्रेम शताब्दी महोत्सव” मे जनसैलाब- जैन धर्म के संदेश से मानवता और धरती बचाइए: गिरीश शाह

 

 

रिपोर्ट :डॉ. आर. बी. चौधरी
प्रधान संपादक एवं मीडिया हेड (अवकाश प्राप्त ),भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड ,
वन,पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय,भारत सरकार

23 मार्च, 2019, मुंबई (महाराष्ट्र)

जैन धर्म के समकालीन संतो में तपागच्छापति प्रेम सुरेश्वर जी महाराज का नाम बड़े ही सम्मान के साथ लिया जाता है. मुंबई शहर मे राष्ट्रीय स्तर पर जैन समुदाय ने उनकी जन्म शताब्दी के अवसर पर “श्री गुरु प्रेम शताब्दी महोत्सव का भव्य आयोजन किया है जिसका उद्देश्य है वर्तमान परिवेश में जीवन की टूटती बिखरती जीवन की मर्यादाये और उसकी अस्मिता को बनाए रखना। गोरेगांव पश्चिम में आयोजित 5 दिवसीय इस महोत्सव के तीसरे दिन आयोजन समिति के प्रतिनिधि गिरीश जे. शाह ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से लोगों में जीवन में गिरते हुए मानवीय मूल्यों और इंसानियत को बचाने हेतु जैन धर्म के दर्शन को आम आदमी के बीच में ले जाने का एक बहुआयामी जनजागृति का प्रयास किया जारहा है ताकि लोगों में धर्म में समाहित विज्ञान समझ में आये और इन्सान के साथ पर्यावरण और धरती बचाई जा सके ।

उन्होंने यह बताया गया कि यह 5 दिवसीय समारोह 20 मार्च से आरंभ होकर 24 मार्च तक जारी रहेगा जिसमें जिसमें जैन धर्म के सिद्धांतों को समझाने एवं आम आदमी को व्यावहार में उतारने के लिए प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें जिसमें जीवन के अभ्युदय से लेकर उसके संचालन, परिचालन और आने वाली चुनौतियों को जैन शास्त्र के उपदेशों के माध्यम से सुलझाने का रोचक प्रयास किया गया है। जैन शास्त्र आज के परिपेक्ष में जैन धर्माचरण पर्यावरण सुरक्षा से लेकर जीव-जंतुओं के रक्षण -संरक्षण और संवर्धन की राह बताने में अत्यंत सटीक एवं अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है क्योंकि आज पृथ्वी पर से जीवन का अस्तित्व निरंतर खतरे की ओर बढ़ रहा है।

श्री गुरु प्रेम शताब्दी महोत्सव को प्रदर्शित करने के लिए कुल चार पंडाल लगाए गए हैं जो जैन धर्म के सभी आयाम एक सूत्र में पिरो देता देने में भली प्रकार सक्षंम है। इस प्रकार प्रदर्शनी का पहरा पंडाल “जैनलॉजी” को समर्पित है तो दूसरा जैन धर्म के व्यावहारिक उपादेयता का दर्शन कराता है। और तीसरा जैन धर्म के मंदिरों मूर्तियों में आध्यात्म की झलक को अभिनव वास्तु शिल्प की मौन मनमोहक कलाकृतियां अपने-आप समझने पर विवश कर देतीं हैं। वहीँ आखिरी पंडाल में बच्चों के मनोरंजन को हिंदुस्तान की वर्तमान उपलब्धियों पर प्रस्तुत विविध एवं झांकी के माध्यम से बच्चों को आधुनिक भारत की उपलब्धियों को बड़े ही आकर्षक ढंग से बताया गया है। जिसमें अन्र्राष्ट्रीय सुरक्षा , भारतीयता ,देशभक्ति आदि को दर्शाने के लिए महापुरुषों की डाकूमेंट्री फ़िल्में, सम्भाषण ,चित्रावली आदि को सम्मिलित किया गया है तो इसी में एक किनारे “सर्जिकल स्ट्राइक” की मनोरम झांकी है तो भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के “मन की बात” के साथ बच्चों से संवाद की ऑडियो-विडिओ भी लगातार चल रहा है।

इस महोत्सव में तकरीबन 25 से 30,000 लोगों की भीड़ उमड़ रोजाना उमड़ रही हैं। महोत्सव में 300 से जायदा बिजनेस स्टॉल भी लगाए गए हैं जहां पर हर प्रकार की आकषक वस्तुएं एक स्थान पर उपलध है।महोत्सव में सभी के लिए स्वादिष्ट भोजन की भी उत्तम व्यवस्था की गयी है। महोत्स्व में 10,000 अधिक युवाओं के रक्तदान का लक्ष्य रखा गया है जो लक्ष्य प्राप्ति की ओर बढ़ रहा है । एक अनुमान के आधार पर महोत्सव की तैयारी में तकरीबन एक साल का समय लग है जिसका भरी-भरकम खर्च आया है।

महोत्सव के सभी पंडाल वातानुकूलित हैं। एक अनुमान के मुताबिक 10 -15 एकड़ के मैदान आयोजित महोत्सव में बच्चों के मनोरंजन के साधन का विशेष ध्यान रखा गया है।बच्चों के मनोरंजन के लिए बड़ी स्क्रीन पर महापुषों पर फ़िल्में दिखाई भी दिखाई जा रहीं हैं। महोत्सव का हर दृश्य मनोरम है। दो बड़े पांडालों ने चलरहे धार्मिक व्याख्यानो के बीच बीच में कई मनोरंजन के कार्यक्रम मिला देने से चलरहा प्रवचन और मनमोहक हो जाता है।

बॉलीवुड के कलाकार तारक मेहता सहित उनके अन्य साथी , दिब्यांग हास्य-बाल कलाकार जय छानी और सुप्रसिद्ध गुजराती गायक ओस्मन मीर की मधुर प्रस्तुति से इस आयोजन में चार चांद लगा दिया। गिरीश जे. शाह ने बताया इस आयोजन में जीव दया से संबंधित कार्यों में सफलता जैन मुनि केसी महाराज जी साहब के प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से सफल हो पाया है।

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