स्वास्थ्य

आज से होने जा रहा है ड्रोन का रजिस्ट्रेशन, पढ़ें वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने शुक्रवार को कहा कि शनिवार से ड्रोन के इस्तेमाल के लिए पंजीकरण शुरू हो जाएगा, यह एक ऐतिहासिक दिन होगा। उन्होंने कहा, अन्य जरूरतों के साथ-साथ एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक प्रत्यारोपण के लिए अंग ले जाने में भी इन ड्रोन का इस्तेमाल होगा। योजना के एक महीने के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।

सिन्हा ने बताया कि प्रत्यारोपण के लिए अंग ले जाने में समय की पाबंदी होती है। एक निश्चित समय के भीतर अंग को एक शरीर या ‘ऑर्गन बैंक’ से निकालकर जरूरतमंद मरीज के शरीर में लगाना होता है। सड़क मार्ग की तुलना में ड्रोन से इन अंगों को पहुंचाने में आसानी होगी।

केंद्रीय राज्यमंत्री ने बताया कि इस उद्देश्य के लिए अस्पतालों में ‘ड्रोन पोर्ट’ बनाए जाएंगे, जहां ड्रोन के उतरने और उड़ान भरने की विशेष सुविधा होगी। इसके अलावा हवा में विशेष ‘एयर कॉरिडोर’ बनाए जाएंगे। इस मार्ग से अंगों को कम से कम समय में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा।

ड्रोन 2.0 योजना पर भी शुरू होगी :

सिन्हा ने कहा, ड्रोन का इस्तेमाल शुरू होने के बाद जल्द ही ड्रोन 2.0 पर भी काम शुरू हो जाएगा। इसमें दृष्टि सीमा से दूर भी ड्रोन उड़ाने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही सामानों की डिलिवरी आदि की अनुमति भी दूसरे चरण के दिशा-निदेर्शों में देने की योजना है। उन्होंने कहा कि अभी ड्रोन का नियंत्रण दूर नियंत्रण कक्ष में बैठे पायलट द्वारा करने की अनुमति दी गई है। लेकिन ड्रोन 2.0 में ऑटोमेटेड ड्रोन की अनुमति भी दी जाएगी, जिसके नियंत्रण के लिए पायलट की जरूरत नहीं होगी।

शादी की तस्वीर सहित कई शौक पूरे कर सकेंगे

सरकार ने देश में ड्रोन के परिचालन के लिए नियमों को शनिवार से लागू कर दिया। इससे प्रत्यारोपण के लिए अंगों को एक स्थान से ले जाने का काम किया जाएगा। आम लोग भी ड्रोन से जिंदगी के खूबसूरत लमहों की तस्वीर उतार सकेंगे। नियमों की अनदेखी करने पर मुश्किल भी हो सकती है।

यह सतर्कता बरतें

’ ड्रोन के संचालन के लिए संबंधित प्राधिकार में पहले पंजीकरण कराना होगा

’ केवल दृष्टिसीमा तक ही इनका किया जा सकेगा संचालन वह भी केवल दिन में

’ किसी परिसर में रात को भी 200 फीट की ऊंचाई तक उड़ाए जा सकेंगे ड्रोन

आयातकों और निर्माताओं के लिए शर्तें

’ ड्रोन आयातक दूरसंचार विभाग से पुष्टि कराएगा कि ड्रोन गैर लाइसेंस फ्रीक्वेंसी पर काम करता है।

’ नैनो के इतर ड्रोन के आयात के लिए डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर डीजीसीए की अनुमति लेनी होगी।

’ डीजीसीए की अनुमति के बाद ही विदेश व्यापार महानिदेशालय आयात के लिए लाइसेंस जारी करेगा

’ स्थानीय ड्रोन निर्माताओं को भी दूरसंचार विभाग से अनापत्ति पत्र लेना होगा, तभी मिलेगी यूआईएन

कैसे-कैसे ड्रोन

’ नैनो ड्रोन : 250 ग्राम या इससे कम वजन वाले होते हैं और अधिकतम 50 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं।

’ माइक्रो ड्रोन : 250 ग्राम से दो किलो वजन के ड्रोन इस श्रेणी में आते हैं। इसको उड़ाने के लिए यूआईएन लेनी होगी। लेकिन 200 फीट से अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने के लिए परिचाल परमिट की भी जरूरी।

’ छोटे ड्रोन : दो से 25 किलोग्राम के ड्रोनों को इस श्रेणी में रखा गया है। कीटनाशकों के छिड़काव आदि में इसका इस्तेमाल लाभदायक।

’ मध्यम ड्रोन : 25 से 150 किलो वजन के होते हैं। खनन, तेल-गैस की खोज में इनका इस्तेमाल होता है।

’ बड़े ड्रोन : 150 किलोग्राम से अधिक वजन वाले ड्रोन का प्रयोग औद्योगिक कार्यों में होता है।

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